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Sunday, April 27, 2014

विश्व मलेरिया दिवस...छोटा डंक और बड़ा खतरा



मलेरिया के खिलाफ लड़ाई के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की बड़ी मात्रा में निवेश की अपील
नई दिल्ली २४ अप्रैल (निहाल सिंह) एक तुच्छ-सा  दिखने वाला जीवाणु का मामूली रूप से काटा जाना किसी की जिंदगी को भीषण खतरे में डाल सकता है। मच्छर जैसे जीवों के काटने से होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक ढंग से बढ़ रही है। अत्यधिक तापमान और अधिक नमी की ऊष्णकटिबंधीय स्थितियों में मनुष्य को गंभीर शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हर चार में से तीन व्यक्ति मलेरिया के जोखिम पर
विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया के उन्मूलन के लिए सरकारों, कोरपोरेट सेक्टर एवं विकास भागीदारों से ज्Þयादा से ज्Þयादा निवेश करने के लिए अपील करते हुए कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र, जहां दुनिया की एक चौथाई आबादी रहती है, में हर चार में से तीन व्यक्ति मलेरिया के जोखिम पर हैं। हालांकि मलेरिया के मामलों की संख्या जो 2000 में 29 लाख थी, वह 2012 में कम हो कर 20 लाख के आंकड़े पर आ गई है, फिर भी यह बीमारी यहां के लोगों के जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
रोकथाम और नियंत्रण
एसोचौम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि अब समय आ गया है कि मच्छरों को नियंत्रित करने की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाए। वर्ष 1940 के दशक में सिंथेटिक कीटनाशकों का निर्माण बहुत बड़ी उपलब्धि थी और 1940 तथा 50 के दशकों में बड़े पैमाने पर इन कीटनाशक दवाओं के इस्तेमाल से मच्छरजनित बीमारियों पर काबू पाया गया, लेकिन पिछले दो दशकों में रोगाणुवाहक जीव जन्य बीमारियां फिर से उभरी हैं या दुनिया के कई नये हिस्सों में फैल गई हैं।
मलेरिया की रोकथाम और नियंत्रण के मुख्य उपाय
रावत ने कहा कि मच्छरों के डंक से बचने के लिए मच्छरदानियों का प्रयोग, घरों के अंदर स्प्रे, घरों के बाहर स्प्रे, पानी में रसायन डालना, मच्छर भगाने वाले कॉयल्स और वेपोराइजिंग मैट्स का इस्तेमाल, रोगाणुवाहक (वेक्टर) जीवों के बढ़ने पर रोक लगाना,परजीवियों, कीटभक्षियों या अन्य जीवों के इस्तेमाल के जरिए रोगाणुवाहक (वेक्टर) जीवों के बढ़ने पर नियंत्रण,रोगाणुवाहक (वेक्टर) जीवों की उत्पत्ति पर नियंत्रण के उपाय, कूड़ा कचरा प्रबंधन,घरों के डिजाइन में सुधार लाने की जरुरत है।

दक्षिण-पूर्वी एशिया के लिए डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक डॉ़ पूनम खेत्रपाल सिंह कहती हैं कि हमें मलेरिया पर लगातार निगरानी रखनी होगी। रोग के निदान, दवाओं, कीटनाशक लारा उपचारित मच्छरदानियों, अनुसंधान एवं दवा के लिए प्रतिक्रिया और कीटनाशकों के प्रतिरोध के लिए वित्तपोषण को बढ़ाने की आवश्यकता है। हमें समुदायों को सशक्त बनाना होगा कि अपने आप को इससे सुरक्षित रख सकें। मलेरिया के उन्मूलन के लिए बड़े पैमाने पर राजनैतिक सहयोग की भी आवश्यकता है।
एनोफिलिज मच्छरों का प्रतिरोधी क्षमता विकसित करना चिंता का विषय
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) के माइक्रोबायलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ विजयानी कहते हैं कि मलेरिया के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि एनोफिलिजÞ मच्छर, जो मलेरिया परजीवी के वाहक हैं, वे कीटनाशकों के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर रहें हैं। हमें कीटनाशकों के लिए मच्छरों की प्रतिरोधी क्षमता के प्रसार को जल्द से जल्द रोकना होगा। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों से मलेरिया का पूरी तरह से उन्मूलन हो चुका है, उन क्षेत्रों में मलेरिया के पुन: संचरण को रोकना एक बड़ा मुद्दा है, जिसके लिए त्वरित प्रतिक्रिया एवं लगातार निगरानी बनाए रखने की जÞरूरत है।  डॉ विजयानी के मुताबिक नए उपकरणों के विकास के लिए, मलेरिया नियन्त्रण प्रोग्राम में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अनुसंधान के लिए तथा मौजूदा उपायों के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए निवेश की आवश्यकता है। हमें हमारी स्वास्थ्य प्रणालियों को सशक्त बनाना होगा, और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में मलेरिया उन्मूलन हेतू गतिविधियों में तेजÞी लानी होगी।
बॉक्स
मलेरिया एक घातक बीमारी है जो प्लाज्Þमोडियम परजीवी के कारण होती है। यह परजीवी संक्रमित एनोफिलिजÞ मच्छर के काटने से लोगों में फैलता है, जिसे ‘‘मलेरिया का वाहक’’ कहा जाता है, यह मच्छर आमतौर पर सुर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय में काटता है। मलेरिया की रोकथान और इलाज सम्भव है। मच्छरों से बचने के लिए रात में कीटनाशकों लारा उपचारित मच्छरदानी का इस्तेमाल किया