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Sunday, July 10, 2016

दिल्ली केंदित मीडिया होना विकास के लिए खतरा...

अब कहा है रवीश कुमार

पत्रकारिता में दाखिला लिया था, उस दौरान दिल्ली में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। तो पूरे दिन सभी समाचार चैनलों पर दिल्ली की यमुना की तस्वीर यमुना में बोट लेकर पत्रकारों द्वारा जल का बहाव दिखाने की कोशिश, यमुना में बहकर आ रही सब्जियां जैसी खबरे खूब दिखाई जा रही थी। चूंकि मैं पत्रकारिता का छात्र था तो उस दौरान कई दूसरे क्लासमेट अन्य राज्यों से पढ़ने आए थे। उस समय में खबरों का आकलन करने की सोच धीरे-धीरे विकसित हो रही थी। जो दोस्त बाहर से पढ़ने आए थे वह इतने घबराएं हुए नहीं थे, जितने उनके माता पिता घबराए हुए थे। रोजाना दोस्तों को हर तीसरे चौथे घंटे पर फोन आता था कि बाढ़ का पानी कही तुम्हारे घर के पास तो नहीं पहुंचा, अगर ऐसा कुछ हैं तो वापस घर आ जाओं जब बाढ़ चली जाएगी तो वापस चले जाना। मेरे दोस्त कभी हंसते हुए तो कभी गंभीरता से अपने अभिभावकों को विश्वास दिलाते कि उन्हें कुछ नहीं होगा। उस समय समझ आया कि एक माता पिता के लिए अपने बच्चे को दूसरे राज्य में पढाई के लिए भेजना कितना चिंता करने वाला काम होता है। खैर लेकिन बारिश बंद हुए बाढ़ नहीं आई। हा शास्त्री पार्क के कुछ मकानों पर घुटने भर का पानी आ गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ कि पूरी दिल्ली बाढ़ से ठप्प हो गई है। मुश्किल से मुश्किल 30-40 हजार अंदाजन लोग इस बाढ से प्रभावित हुए होंगे।
दूसरी घटना पत्रकारिता की पढाई पूरी करने के बाद वर्ष 2013 में देखने को मिली उस समय मैं भी सक्रिय रूप से पत्रकारिता में आ गया था। हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजैंसी में काम कर रहा था, और दूसरी ओर मेरा नवोदय टाइम्स की लांचिंग से पहले ज्वाइनिंग की तैयारी कर रहा था। उस दौरान भी दिल्ली में बाढ़ आई। नवोदय टाइम्स के लिए मैने बाढ़ प्रभावितों से बातचीत करके खूब खबरें की। उस समय चूंकि ज्वाइनिंग नहीं हुई थी तो खबरों पर नाम नहीं छप रहा था, लेकिन कुछ दिनों ज्वाइनिंग की प्रक्रिया भी पूरी हो गई और खबरों पर नाम  भी छपने लगा। चलिए मान लिया की मैंने दिल्ली के अखबार होने के नातें दिल्ली की घटना की जानकारी अपने समाचार पत्र के लिए एकत्रित की। लेकिन क्या राष्ट्रीय चैनलों की इतनी जिम्मेदारी नहीं बनती है कि वह राष्ट्रीय खबरों को प्रमुखता से दिखाएं। कल रात को समाचार देख रहा था, जिसमें पूर्वोत्तर के असम गुवाहाटी में आई बाढ़ की खबर को रात के बुलेटिन में करीब 30 सैंकेड की जगह मिली।  मैं हैरान तो नहीं था लेकिन मन में चिंता जरूर हुई की अब हमारा मीडिया कितना दिल्ली केंद्रित हो गया है। चाहे चुनाव हो या फिर सामाजिक समस्या दिल्ली की ज्यादा कवर की जाती है। अगर यही खबरें अगर पूर्वोत्तर और दक्षित भारत से आएं तो उन्हे रात के बुलेटिन में जगह दी जाती है।  मैं चिंतित था कि समाज को आईने दिखाने वाले समाचार चैनलों के लिए पूर्वोत्तर या दक्षिण भारत की खबरों को कितना गंभीरता से लेते है। क्योंकि वहां चैनल वालों को बाजारी लाभ नहीं मिलता। जो मीडिया चैनल दिल्ली के यमुना के थोड़े से पानी बढ़ने को लेकर अपनी छाती पीटता है वह एक लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित करने वाली असम के गुवहाटी की बाढ़ को केवल औपचारिकता मात्र की खबरों में जगह देता है। दिल्ली से कोई भी रिपोर्टर वहां कवर करने नहीं जाता है। अगर दिल्ली में बाढ़ आ जाती है तो खुद एनडीटीवी के तथाकथित भेड़ चाल से अलग चलने वाले रवीश कुमार भी नांव में बोट लेकर हाल दिखाना शुरू कर देते है। लेकिन गुवहाटी की बाढ़ में यह नजर नहीं आए। जहां पर एक एक मंजिल से ऊपर पानी घरों में घुस गया है। लोगों के लिए खाने के लाले पड़े है।  मेरा मानना है कि ऐसा करना समाचार चैनलों के लिए ऐसा करना देश के विकास के घातक है। क्योंकि जब देश के सीमावर्ती राज्यों की जानकारी राष्ट्रीय मीडिया में नहीं आएगी,तो उससे उन राज्यों में रहने वाले लोगों में हीन भावना आएगी।

Thursday, July 7, 2016

सबसे आगे हम





1 जुलाई 2016 को पंजाब केसरी में प्रकाशित



 7 जुलाई को दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकारशित

खबर की सॉफ्ट कॉपी
देश और विदेश में राजधानी दिल्ली की छवि सुधारने के लिए दिल्ली सरकार जुलाई के मध्य में भिखारी मुक्त अभियान शुरू करने जा रही है। इस अभियान के तहत न केवल भिखारियों को पकड़ा जाएगा, बल्कि भिखारियों का पुर्नउद्धार हो सकें इसके लिए विशेष अभियान भी सरकार चलाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली का सामाजिक कल्याण विभाग ने भिखारी मुक्त अभियान की योजना तैयार की है। जिसके पहले चरण की कड़ी में जुलाई में शुरू किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि भिखारी मुक्त अभियान के लिए दिल्ली सरकार ने विशेष अभियान चलाऩे का फैसला लिया है। जिसके जरिए दिल्ली के विभिन्न इलाकों में भिखारियों को पकड़ा जाएगा। दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री संदीप जैन दिल्ली के कनाट पैलेस में इस अभियान का शुंभआरंभ करेंगे।इसके लिए दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर दिल्ली सरकार ने सात टीमें गठित की है। यह टीमें दिल्ली के विभिन्न इलाकों मे जाकर भिखारियों को पकड़ेगी। सूत्रों ने बताया कि अभियान का पहला चरण परिक्षण के आधार पर चलेगा। अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो आगे भी यह जारी रहेगा।

समाज कल्याण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश की राजधानी होने की वजह न केवल अन्य राज्यों के लाखों पर्यटक दिल्ली में आते हैं बल्कि विदेशों से भी आने वाले पर्यटकों की भी संख्या की बढ़ी तादात होती है। लेकिन जब वह पर्यटक दिल्ली के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर जाते हैं तो उन्हें भिखारियों का सामना करना पड़ता है। कई घटनाएं सामने आई है कि भिखारियों की वजह से पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। इसकी वजह से पर्यटक दिल्ली की नकारात्मक छवि लेकर जाते है। अगर दिल्ली को भिखारी मुक्त बना दिया गया तो

होगी विडियों ग्राफी, चालू होंगे मोबाइल कोर्ट

दिल्ली सरकार के सूत्रों ने बताया कि भिखारियों को पकड़ने के लिए चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत भिखारियों की विडियों ग्राफी की जाएगी। जिसके बाद भिखारियों के लिए बनी मोबाइल कोर्ट में इन्हें इस विडियों के आधार पर पेश किया जाएगा। जानकारों की मानें तो जब भिखारियों को पकड़ा जाता है तो उन्हें मोबाइल कोर्ट में पेश किया जाता है। लेकिन अक्सर देखने में आया है कि भिखारी को जब कोर्ट में पेश किया जाता है तो उनका भिखारी होने को साबित नहीं किया जाता। क्योंकि इसके पीछे एक बढ़ा रैकेट काम करता है जो इन मोबाइल कोर्ट से भिखारियों को रिहा करा लेता है। इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार भिखारी मुक्त अभियान के लिए खुफिया कैमरों के साथ समान्य कैमरों से भी रिकार्डिंग करेगी।

लामपुर में पुर्नउद्धार सैंटर में दी जाएगी रोजगार की ट्रैनिग

सूत्रों के मुताबिक भिखारी मुक्त दिल्ली अभियान के तहत दिल्ली सरकार जिन भिखारियों को पकड़ेगी उनका पुर्नउद्धार लाम पुर स्थित भिखारी पुर्नउद्धार केन्द्र में किया जाएगा। जहां महिलाओं को सिलाई की ट्रैनिंग तो वहीं पुरूषों को रोजगार की विभिन्न विधाएं सिखाई जा

Sunday, May 22, 2016

अप्रैल 2016










गर्मी में वॉटर पार्क, यानि मस्ती पॉवरकूल

दिल्ली में वॉटर पार्क में बुझाएं गर्मी

बढ़ती गर्मी ने दिल्ली का पारा बढ़ा दिया है। ऐसे में दिल्ली में बने यह वॉटर पार्क आपकी गर्मी को दूर कर सकते है। दिल्ली के अलग-अलग कौने में बने वॉटर पार्क में आप अपनी गर्मी को ठंडा कर सकते है। मौज मस्ती और खाने के साथ पूरा परिवार भी इन वॉटर पार्क में जा सकता है। साथ ही पूरे दिन को मस्ती से भरा बना सकता है। अगर आप गर्मी में परिवार के साथ एक दिन के मस्ती करना चाहते हैं तो यह वॉटर पार्क आपके एक दिन को मस्ती भरा बना सकते है।

दो से तीन दिन का भी होता है पैकेज
अक्सर वॉटर पार्क की सोच कर ऐसा लगता है कि यह सिर्फ एक दिन के लिए हो सकता है। लोगों  में आम धारणा है कि सुबह से लेकर शाम तक इन वॉटर पार्क में मस्ती की जा सकती है। जबकि ऐसा नहीं है। दिल्ली के कई नामी गिरामी वॉटर पार्क है, जिसमें 2-3 दिन का पैकेज होता है। जिसमें न केवल पूरा परिवार आउटिंग की योजना बना सकता है बल्कि पूरा परिवार एक साथ पूरी मस्ती कर सकता है। कई वॉटर पार्क्स तो दिन में मौज मस्ती के साथ रात में स्थानीय कलाओं के साथ संस्कृति को भी दिखाते है।
किफायती मौज मस्ती
वॉटर पार्क को अगर किफायती मौज मस्ती का नाम दिया जाएं तो यह कोई गलत नहीं होगा। दिल्ली में करीब आधा दर्जन वॉटर पार्क चल रहे है। सभी की फीस का मिला जुला असर निकाला जाए तो यह काफी किफायती है। इसमें एक दिन का पैकेज  अगर आप लेना चाहें तो  3800 रूपए में मिल सकता है, तो वही दोपहर 12 बजे से 12 रात तक का पैकेज भी सात हजार तक मिल सकता है। इस पैकेज की खास बात यह है कि छोटी फैमली इसका पूरा लाभ ले सकती है। जिसमें एक पति-पत्नी के साथ दस साल से कम उम्र का बच्चा भी इस पैकेज में शामिल हो सकता है।  वहीं अगर आप फैमली के साथ वॉटर पार्क में दो –तीन दिन की मस्ती करना चाहते हैं तो 7200 रूपए तक का पड़ सकता है।
योजना बनाने से पहले ले पूरी जानकारी
अगर आप दिल्ली में वॉटर पार्क में मौज मस्ती करने जाने का प्लान बना रहे हैं तो आप इंटरनेट या फोन के माध्यम से वॉटर पार्क की सुरक्षा और पैकेज की पूरी जानकारी ले लेँ । जाने से पहले  इंटरनेट पर वॉटर पार्क की जानकारी ले। ताकि वहां पहुंचने पर जेब खाली होने का एहसास न हो। ज्यादातर वॉटर पार्क अपने हिसाब से पैकेज बनाते है। इ
सलिए जाने से पहले पैकेज में खाने की जानकारी के साथ लोगों की संख्या का भी पता कर लेँ।
- निहाल सिंह (लेखक दिल्ली के प्रतिष्ठित अखबार में कार्यरत्त है)