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Sunday, April 17, 2011

बस स्टैंड या गाडी पार्किंग स्टैंड ?


गाँधी नगर पुस्ता बस स्टैंड पर खड़ी अवैध पार्किंग 

पूर्वी दिल्ली | दिल्ली में जाम कि समस्या आम हो चुकी है इसके बचने क लिए दिल्ली ट्राफिक पुलिस समय समय पर फ़िल्मी सितारों व क्रिकेटरों को द्वारा ट्राफिक नियमो का पालन का प्रचार करते नजर आ जाते है | लेकिन आप को ये तस्वीर देख रहे है ये तस्वीर उन सरे नियमो कि दझिया उडा रही है | ये कोई आम बात नही कि ये सिर्फ चंद घंटो क लिए नही बल्कि आपको ये अवैध जगह खड़े वाहन आपको देर रात तक भी खड़े मिल जायेंगे |
अवैध पार्किंग में क़तर में लगी गाड़िया 
 ये तस्वीर है गाँधी नगर पुस्ता रोड की जहा पर बस स्टैंड व इसके आस पास सेकड़ो गाड़िया अवैध रूप से खड़ी रहती है | जिससे यहाँ के यतायात में तो रुकावट आती ही है साथ ही बस में सफ़र करने वाले मुसाफिरों  को भी  काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है | क्योकि जब बस स्टैंड पर इस तरह से अवैध पार्किंग कर दी जाएगी तो मुसाफिर खा से बस स्टैंड का फ़ायदा उठा पाएंगे |


Tuesday, September 7, 2010

अपना धर्म और ईमान भूले दिल्ली के सफदरगंज अश्पताल के डॉक्टर

अपना धर्म और ईमान भूले दिल्ली के सफदरगंज अश्पताल के डॉक्टर
जब किसी सरकारी कर्मचारी को देश कि सेवा करने का मौका दिया जाता है तो उससे एक सपथ ली जाती है कि वे देश में इमानदारी और अपने ईमान  को ध्यान में रखकर देश कि सेवा करेगा |
लेकिन शायद अब सफदरगंज  अश्पताल के डोक्टारो को वो सपथ याद नहीं है जिससे ये लगता है कि वे अप ईमान भूल चुके है
और जीने इस दुनिया में भगवान् का दर्जा दिया जाता है अब वो उन लोगो के लिए  सैतान बन चुके है जो लोग ( मरीज ) इलाज के लिए सफदरगंज  अश्पताल में इलाज के लिए इधर उधर भटक रहे है , कोई गर्भवती महिला  है और कोई राजधानी जब डेंगू  एक गंभीर रूप ले चूका है उस समय ये लगभग ७०० डॉक्टर और सभी महिला कर्मी भी अनिचित्कालिन हड़ताल पर चले गए है  , जैसे इन्हें अपने देश की सेवा करने की जो शपथ ली थी इन्हें उसकी कोई परवाह ही नहीं क्या प्रशासन ये भूल गया है की इस शपथ का पालन न  करने पर क्या कदम उठाया जाता  है
 खैर
दिल्ली में सुरक्षा कि मांग करने वाले  सफदरगंज  अश्पताल के के डाक्टरों  को भला अब कोन समझाए कि जिस राजधानी में प्रतिदिन लूटपाट और बलात्कार और चोरी डकेती होती काफी बड़ी मात्र में होती हो |
और जिस  राजधानी में सिर्फ हम उन घटनाओ के सिर्फ मुल्दर्शक बनकर रह जाते है और सरकार सिर्फ कार्यवाही तथा तफ्तीश के वादे करती हो उस राजधानी की सरकार से आप अपने सुराचा के लिए कैसे भरोषा कर सकते है , और जिस देश के बच्चे - बच्चे को जहा पैसे से हर काम हो जाता हो इन पर आप क्या भरोषा करेंगे  |
चलो माना की हॉस्पिटल में आपको मरीजो के परिजनों से दर लगता है लेकिन आप ये सोचिये  की घर में आप किस किस से डरते है ( कही चोरी न हो जाए ) ये दर तो आपको कभी न कभी तो लगता ही होगा
ये सब छोड़िए अब आप अपने इस देश की पब्लिक द्वारा दिए गए सम्मान यानि भगवान् के रूप को धारण कीजिये और और अपने फ़र्ज़ निभाइए नहीं तो आप जानते ही है की जब इंसान का विश्वाश भगवान् से उठता है वो क्या करने प[आर मजबूर होता है |

Sunday, February 28, 2010

बुरा ना मानो महगाई है !















होली आ गई है बाजारों में भीड़ पहेले की मुताबिक कम है क्योकि महगाई ने होली के रंगों को हल्का कर दिया है , इस बार होली का रंगों और पिचकारियो के आसमान छु चुके दामो ने लोगो के चेहरों के रंग उडा दिए है .........
भैया चारो तरफ महागाई है फिर कहा किसे सुध होली की आई है ?????????????
इस मोके पर चार पंक्तिया पेश करने की मन में आई है
होली आई है रंगों की
महगाई ने वाट लगाईं है रंगों की
पिचकारी भी चल रही है बिन पानी के
क्योकि पानी के दाम बढने के बाद होली आई है
चीनी के बड़े दामो से .......
गुजिया भी लग रही है फीकी
पापड़ भी कच्चे खाने पढ़ जायेंगे
क्योकि तेल बिन हम यही कर पाएंगे
कैसे जायेंगे रिश्ते दारो के घर
क्या पेट्रोल क्या शीला दीछित के चाचा भरवाएंगे
प्रणव ने बजट में महगाई ही महगाई दिखाई है
और इस बात के साबशी पाई है की उसकी सरकार फिर एक बार महगाई रोकने में नाकामयाब नजर आई है
भैया हो जाओ तैयार फिर आम आदमी की सरकार आम आदमी को मरने को आई है
क्योकि ये मुशीबत निहाल सिंह को सताई है इसलिए ये नै पोस्ट कर दी हमने भाई |

Wednesday, February 24, 2010

बेरोजगारी भुकमरी और मुग़ल गार्डेन


मेरा पसंदीदा चिट्ठाजगत फीड कड़ी
अभी भारत के सबसे बड़ी हस्ती मानी जाने वाली जगह राष्ट्रपति भवन आम जनता के लिए खोला गया है , इस बात की खबर मिलते ही हम सभी क्लास वालों ने ये जगह देखने के लिए मुग़ल गार्डेन का प्लान बनाया इसके लिए तारिक तय हुई २३ फरबरी २०१० और इस दिन चल दिए हम मुग़ल गार्डेन के सफ़र के लिए दिल्ली की बसों में धाके खाते हुए और जेबकतरों से बचते हुए और थोड पैदल यात्रा के जरिये पहुच गए हम मुग़ल गार्डेन
वह जाकर हमने अपना सामान (मोबाइल और अन्य बस्तुये ) जमा करा के अंदर जाने की तैयारी की कतार बना के अन्दर पहुचे तो वहा का नजारा कुछ और ही था में तो दंग था की जिस देश में गरीब को रहने के लिए जगह नहीं है और जहा आम आदमी भुकमरी और बेरोजगारी से मर रहा है उस देश के रास्त्रपति भवन में आर्बो रुपया सालाना खर्च किया जाता है ५०० एकड़ में फैले इस गार्डेन पर भारी मात्रा में पैसा भाहाया जाता है , ,,,,,,,,,,,,,,,,,
लेकिन ऐसे गार्डेन का हम क्या करेंगे जिस से आम आदमी और देश के किसी व्यक्ति का कोई फ़ायदा नहीं होता लाखो रूपये तो उसकी देख रेख में खर्च हो जाते है,,,,,,,,,,,,,
अब घुमने समय में सबकी प्रतिकिरियाओं पर दयां बड़ी गोर से दे रहा था की कोण क्या बोल रहा है यहाँ तरुण ने एक बात बोली की अगर रास्त्रपति बनने का कोई कोर्से होता तो कितना मजा आता
लडकिया भी बोलने लगी की हमे भी राष्ट्रपति बनना है वोह जगह क्योकि ५०० एकड़ में फैली हुई थी तो हम घूमते- घूमते थक गए थे |
कभी - कभी में ये सोचता था की आम आदमी को ही बिमारी लगाती है हमारे नेता क्यों नहीं बीमार पड़ते वो ऐसा क्या खाते है इसका जबाब मुझे मुग़ल गरेदं जाकर पता चल गया ........
जब इतनी सुंदर जगह जिस को मिल जाये तो भला वो कैसे बीमार पढ़
सकता है .............
क्या