NewsSite.in
Blog of Journalist Nihal Singh
Monday, November 5, 2012
शकाहार पर एक बहस,
देखों Abp न्यूज दिवाली पर पटाखों से होने वाले शोर का दिखा रहा है कि हमें पटाखे नही जलाने चाहिए.. सराहनीय है. लेकिन कभी ईद पर बेजूबानो की बली दी जाने वाली प्रथा का भी विरोध होना चाहिए...
Unlike
·
·
Share
You,
Megha Jetley
,
Raj Mathur
,
Kuber Sharma
and
11 others
like this.
Syed Mohammad Altamash Jalal
patahke aur eid ko na jode nihal ji ye dono bahut alag topic hai
October 19 at 9:03pm
·
Like
Nouman Ahmed
begal me jo kali mata ko bezuban janbor ki bali di jati h.. or south indai k kai mandiro me b aisa kiya jata hai.. uska b purzor virodh hona chahiye.. sirf baraeid ka nhi...
October 19 at 9:12pm
·
Like
Nihal Singh Arya
Syed Mohammad Altamash Jalal
भाई जो भी समाज की कुरुति हो उसका विरोध होना चाहिए चाहे वो किसी भी धर्म य़ा जाति से जुडी क्यों न हो.. मेरी नजर में दोनो ही चीज समाज की कुरुति के अर्तगत आती है..
October 19 at 9:12pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
Nouman Ahmed
भाई में आपकी बात से सहमत हूं .. इन सब का भी विरोध होना चाहिए...
October 19 at 9:14pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
आज के समय में भी बलि प्रथा पर विश्वाश कब जागेंगे हम...हमें किसी भी निर्दोष व्यक्ति, जीव की हत्या नही करनी चाहिए... इस पृथ्वी लोक पर सभी को जीने का अधिकार है.. (यह बात सिर्फ उन्ही पर लागू होती है जो समाज को किसी भी तरह की क्षति नही पहुचाते)
October 19 at 9:18pm
·
Like
·
2
Nouman Ahmed
janab aisa h ki logo ko khana chhod dena chahiye....
October 19 at 9:19pm
·
Like
Nihal Singh Arya
Nouman Ahmed
भाई जी कम से कम आपने माना तो सही की जिनकी बलि दी जाती है वो बेजूबान होते है..साथ ही निर्दोष भी होते है..
October 19 at 9:20pm
·
Edited
·
Like
·
2
Nouman Ahmed
janab.. ped podhe b bezuban hote hain.. jinko khaya jata h...
October 19 at 9:21pm
·
Like
Nihal Singh Arya
खाने के लिए किसने मना किया आप दाल चावल आटा व अन्य चीजे खा सकते है जो शाकाहार के अर्तगत आती है.. अब आप दही और पालक का उदाहरण मत देना काफी पुराना उदारण है..
October 19 at 9:21pm
·
Like
·
1
Nouman Ahmed
me to un sab cheezo ka example de raha hun.. jin k naam aapne liye hain.. insab me jan hoti hai... scientificly ye proof hua hai...
October 19 at 9:23pm
·
Like
Nihal Singh Arya
तामसी भोजन करने से तामसी बुद्वी हो जाती है.. और इस तरह से हम राक्षसों वाला भोजन करते रहेगे तो कैसे मौहब्बत को फैला पाएंगे
October 19 at 9:23pm
·
Like
·
2
Nihal Singh Arya
मैने पहले ही कहा शाकाहार के अर्तगत आने वाली चीजों का सेवन करना चाहिए.. जिससे देश और समाज को कोई नुकसान नही होता..
October 19 at 9:25pm
·
Like
·
1
Nouman Ahmed
ye zaruri nhi hai janab..... jo aap k mutabik kathit shakahar hai.. usko khane wale kitna piyar krte hain... or samaj or desh kitana nuksan nhi puchate hain... ye aap jante ho
October 19 at 9:27pm
·
Like
Nihal Singh Arya
नूमान जी आप बताओ क्यो हमें माशाहारी (तामसी )भोजन करना चाहिए ..
October 19 at 9:29pm
·
Like
·
1
Nouman Ahmed
hume kyu nhi krna chahiye
October 19 at 9:29pm
·
Like
Nihal Singh Arya
नूमान जी क्या वो मुर्ग बकरे पशु आदि जिनकों लोग खाते है क्या उन्हे जीने का अधिकार नही है..
October 19 at 9:30pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
सभी को पृथ्वी लोक पर जीने का अधिकार है..
October 19 at 9:32pm
·
Like
·
1
Nouman Ahmed
jo ped podhe log khate hain.. unhe jine ka adhikar nhi hai??? unhe to sabse ziyada adhikar hai.. qki unki awaz to hun sun nhi pate hain... koi b maa apne us bache ki ziyada care krti hai.. jo bilkul gunga hota hai.. fir kaise ap ped podho ko khane ko justify kr skte hain
October 19 at 9:33pm
·
Like
Nihal Singh Arya
हा तो कह तो रहा नही सेवन करना चाहिए अब वो पोधे तो बताओ जिनको खाते है आपके अनुसार कथित शाकाहारी..
October 19 at 9:35pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
एक सिंदात और जीओ और जीने दो .
October 19 at 9:37pm
·
Like
Nouman Ahmed
kathit shakahari konse ped phode nhi khate hain ye batao
October 19 at 9:37pm
·
Like
Nouman Ahmed
ye sidhant ped podho pr b logu hota h janab
October 19 at 9:37pm
·
Like
Nihal Singh Arya
नाम बताओ, हवा में बाते करके भ्रमित मत करों ..और जब आप किसी से प्रश्न पूछ सकते है तो दूसरो के प्रश्नो का भी उत्तर देना चाहिए.. दो प्रश्न पूछे दोनो हवा में कर दिए... दोनो प्रश्नो का उत्तर दो क्यो माशाहारी जरुरी है
October 19 at 9:40pm
·
Edited
·
Like
·
1
Manoj Rajput
Bhai baat lambi ho gayi
October 19 at 9:39pm
·
Like
Nouman Ahmed
jitani cheeze apne aap ko shakahari kehne wale khate hain... wo sab ped podho ki catogari me aate hain... inki ango ko tod k khana b utana hi glt hai jitana ki kisi maweshi ko khana
October 19 at 9:40pm
·
Like
Nihal Singh Arya
Manoj Rajput
भाई देश और समाज के लिए जरुरी है यह सब
October 19 at 9:41pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
यह बिलकुल जरूरी नहीं है कि सभी मांसाहारी क्रूर प्रकृति के ही हो, पर यह भी सच्चाई है कि माँसाहारियों के साथ कोमल भावनाओं के नष्ट होने की संभावनाएं अत्यधिक ही होती है
October 19 at 9:41pm
·
Unlike
·
1
Nouman Ahmed
janab is desh me aise sedako log hain jo kathit shakahari hain... lkn kitani komal prakrti k hain ye duniya janti hai.. or duniye ne unki komal prakrti khub dekhi h.....
October 19 at 9:44pm
·
Edited
·
Unlike
·
1
Nihal Singh Arya
जो मेरे सवालो का जवाब न दे में उसको साथ तार्किक बहस नही कर सकता..
October 19 at 9:45pm
·
Unlike
·
2
Nouman Ahmed
ha ha ha ha hah
October 19 at 9:46pm
·
Unlike
·
1
Nouman Ahmed
janab me un kathit shakahariyo ka naam nhi lena cha raha hu... nhi to naam le kr unki komal ta batata
October 19 at 9:55pm
·
Edited
·
Unlike
·
1
Rishabh Shukla
बंद करो कुतर्कों का तांडव,
एबीपी पर बड़ी बहस चल रही है और यहां लंबी बहस...कोई नतीजा नहीं निकलने वाला साब
October 19 at 9:47pm
·
Unlike
·
2
Nouman Ahmed
ye sahi kaha aap ne
Rishabh Shukla
October 19 at 9:48pm
·
Unlike
·
1
Urfee Khan
Nihal Singh Arya
Tm kyu haar saal is topic par behas krte ho??koi reason hota h tabi wo hota h.....samjhe kuch..
October 19 at 10:07pm
·
Unlike
·
2
Nihal Singh Arya
Rishab ji aj k samay me yhi sabse bdi muskil h k hm ldne se pahle haar maan lete h. Agr raja ram mohan rai ne sati pratha k khilaf awaj ni uthai hoti toap smaj skte h ki desh ki kitni ma behne us bhed chaal or kuruti ki wajah se apne jaan gava chuki hoti.
October 19 at 10:20pm
via
mobile
·
Unlike
·
2
Santlal Yadav
sahi kaha nihaji ye hamare desh ka durbhagya hai ki hamare desh ka neta Narendra modi jaise nhi hai. nhi to hamare desh ki ye durdasha nhi hoti.... Log bakari ki bali dete hai Shero ki nhi...isliye ek hi viklap ............?
October 19 at 11:31pm
·
Unlike
·
2
Nihal Singh Arya
Urfee Khan
उर्फी इसे धर्म और जाति से अलग करके देखों
October 19 at 11:33pm
·
Unlike
·
2
Nihal Singh Arya
नूमान पर यह जवाब नही दिया गया कि हमें माशाहार क्यो अपनाना चहिए..
October 19 at 11:38pm
·
Unlike
·
1
Nihal Singh Arya
यही हमारे देश का दुर्भाग्य है कि समाज हित में उठने वाली हर बात को धर्म जाति से जोड़ दिया जाता है...
October 19 at 11:38pm
·
Unlike
·
2
Santlal Yadav
Nihal Singh Arya
maine dharma or jaati se alag kar k kaha hai... hindu koi dharma nhi hai. hindu jivan ki paddhati hai....
October 19 at 11:38pm
·
Unlike
·
3
Nihal Singh Arya
Santlal Yadav
मै आपके विचार से सहमत हू...
Nouman Ahmed
OR
Urfee Khan
OR
Syed Mohammad Altamash Jalal
ने तुरंत इसे अपने अपने धर्म से जोड़कर कुर्तक शुरु कर दिए
October 19 at 11:41pm
·
Edited
·
Unlike
·
1
Santlal Yadav
Nihal Singh Arya
hindu dharm me kahi bhi satyug me bali ki prath nhi hai ....lekin samaj ki kuritiyo ne baad me badalav kiya hai is ka dukh hota hai ...lekin mera aap sabhi se ek prashan hai kya hum aaj is pratha ko badal nhi sakate hai ? agar badal sakte hai to usaka ek hi vikalp hai narendra modi...
October 19 at 11:43pm
·
Unlike
·
1
Nihal Singh Arya
बात निकली है तो दूर तलक जाएगी ..
हर क़ौम और समुदाय के कुछ विशेष त्योहार, उत्सव और प्रसन्नता व्यक्त करने के दिन होते हैं। उस दिन उस क़ौम के लोग अपने रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। लेकिन पर्व के नाम पर हिन्दू हो या मुसलमान किसी को बेजुबान जानवरों की हत्या का अधिकार किसने दे दिया। इस्लाम के जिस संदेश को पहुंचाने के लिए इस त्योहार का सृजन हुआ, उसका मकसद कहीं पीछे छूटता जा रहा है। इस त्योहार की फिलासफी किसी हलाल जानवर की कुरबानी देना भर नहीं है।
जहाँ तक आप फेस्टिवल की बात करते है तो अगर इस्लाम अपनी रीतियों के अनुसार यह पर्व मनाये तो उसे अपने सबसे प्यारी बस्तु कुर्बान करनी होती है इसदिन ..जैसा की पैगम्बर और इस्माइल के संदर्भ में वर्णित है..हजरत इब्राहीम से अल्लाह ने अपनी सबसे कीमती चीज की कुरबानी मांगी थी। उन्होंने काफी सोचने के बाद अपने बेटे की कुरबानी का फैसला किया। हजरत इब्राहीम ने अल्लाह के सामने जो परीक्षा दी, क्या मौजूदा दौर में कोई इंसान उस तरह की परीक्षा दे सकेगा? नामुमकिन है। लेकिन उस कुरबानी के पीछे छिपे संदेश को तो हम अपने जीवन में उतारने की कोशिश कर सकते हैं।
कुर्बानी का मतलब है त्याग, उस चीज का त्याग जो आपको प्रिय हो। आप कुरबानी के जिस बकरे को काजू, बादाम और पिज्जा खिला रहे हैं, वह इससे आपका अजीज नहीं हो जाता, क्योंकि आप उसे कुर्बानी की नीयत से ही मोल ले कर आए हैं। यह सिलसिला कई साल से दोहराया जा रहा है और हर साल यह रिवाज बढ़ता ही जा रहा है। १० दिन पहले जानवरों को खरीदकर जिसके पास जितना पैसा है, वह उसी हिसाब से कुरबानी के बकरे की सेवा करता है और उसके बाद उसे हलाल कर देता है।
भाई जी इन पचड़ो से बचिए यह त्योहार सिर्फ परंपरा निभाने के लिए मत मनाइए। परंपरागत त्योहार हो तेहुए भी इस त्योहार का संदेश कुछ अलग तरह का है। यह त्याग करने का संदेश देता है
October 19 at 11:44pm
·
Like
·
2
Nihal Singh Arya
Nouman
Ahm ed
Syed Mohammad Altamash Jalal
Urfee Khan
कोई तथ्य आधारित तर्क हो तो आमत्रित है..
October 19 at 11:58pm
·
Like
Nihal Singh Arya
कैसे भी करके पेट भरना ही मानव का उद्देश्य नहीं है। यह तो पशुओं का भी स्वभाव है। मानव सदैव 'जीवन-मूल्यों' और 'जीवन-निर्माण' को जीवन की सभी आवश्यकताओं से सर्वोपरी स्थान देता है। हमने प्रकृति प्रदत्त बुद्धि से ही सभ्यता का आरोहण किया है। वही मानव- बुद्धि हमें यह विवेक प्रदान करती है, कि हमारे विचार और व्यवहार सौम्य व पवित्र बने रहे। जिससे कि पृथ्वी पर शान्ति और सन्तोष का वातावरण स्थापित हो..
October 20 at 12:01am
·
Like
·
2
Avenesh Singh
निहाल जी आपके उपर्युक्त सारगर्भित वक्तव्य के बाद इस मुद्दे पर बहस करने के लिए कुछ बचा भी नहीं है। जिनसे आप तर्क आमंत्रित कर रहें हैं वो इस समय बाजार में हलाल करने के लिए बकरों की बोली लगा रहे होगें। जिन्हें सप्ताह भर खिलापिलाकर खुदा के नाम पर खुद हजम कर जाएंगे।
October 20 at 11:49am
·
Unlike
·
2
Avenesh Singh
दूसरा विषय मीडिया का.... पटाखों से ध्वनि प्रदूषण पनपने वालों की बात करने वालों से पूछिए जो भी समाचार पत्र कागजों पर छपते हैं उसका निर्माण कैसे होता है। पेड़ो को काटकर ही कागज तैयार किये जाते हैं और उसी कागज पर समाचार पत्र छपते हैं। देश में प्रतिदिन कितने समाचार पत्र छपते हैं इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने पेड़ों की कटाई होती है तब जाकर इतना कागज तैयार होता होगा..औऱ उसी पर ये पर्यावरण संरक्षण की बात करने लगते हैं। कितना विरोधाभास हैं इन तथ्यों में...खैर छोड़िए
October 20 at 11:53am
·
Unlike
·
3
Kuber Sharma
SAHI KAHA BHAI
October 20 at 1:23pm
·
Like
Nouman Ahmed
निहाल जी आप के मुताबिक जो लोग शाकाहारी होते हैं वो कोमल स्वभाव के होते हैं। जो मांसाहारी होते हैं वो हिंसक प्रवृति के होते हैं। ज़रा यह बताने की कृप्या करेंगे कि जो शाकाहारी होते हैं वो कैसे कोमल स्वाभाव के हो सकते हैं और जो नहीं होते वो कैसे हिंसक प्रवृति के हो सकते हैं????
October 21 at 7:43pm
·
Like
Nouman Ahmed
दूसरा आप कह रहे हैं कि सबको जीने का अधिकार है। तो क्या पेड़ पौधों को जीने का अधिकार नहीं है? वो तो ऐसे बेज़बान है जिनकी आवाज़ भी आप सुन नहीं सकते हैं। जब कोई आपके नाखुन तोड़े तो आपको कितना दर्द होगा। इसी तरह लोग पेड़ पौधों पर उठी वस्तुओं को तोड़कर खाते हैं। क्या उनको दर्द नहीं होता होगा??? तो कौन से वाली अहिसा की बात कर रहे हैं? जो सिर्फ आपके मुताबिक अहिंसा उसकी?? जो बात मैं कह रहा हूं वो वैज्ञानिक पर तौर प्रमाणिक है।
Nihal Singh Arya
October 21 at 7:43pm
·
Like
Nouman Ahmed
तीसरे आपने कहा कि आपने कहा कि कोई तार्किक जवाब हो तो दें। यहां तार्किक जवाब भी आप ही तय कर रहे हैं क्या?? यह जो उक्त मैंने लिखा है यह तथ्य आधारित ही है। हालांकि वो बात अलग है कि यह तथ्य आपको पचेंगे नहीं क्योंकि अगर आप इसको अमल में लियाए तो आप भूखे मर जाएंगे। इसलिए आप यहां इससे सहमत नहीं होंगे। भले ही आप इसे सही माने। आप यहां सिर्फ अपनी बात से सहमत होंगे। क्योंकि आप एक विशेष विचारधार में पले बड़े हैं। वहां आपमें विशेष समुदाय के खिलाफ ज़हर भरा गया है।
Nihal Singh Arya
October 21 at 7:44pm
·
Like
Nouman Ahmed
चैथा आपने कहा कि मानव उद्देश्य सिर्फ पेट भरना नहीं है?? तो मानव की मूलभूत ज़रूरतों में सबसे पहले नंबर पर रोटी क्यों आती है??? और मानव सारे कुकर्म पेट के लिए नहीं करता है। तो किस के लिए करता है??? ज़रा बताएं????
पांचवा आपने कहा कि आपके स्ट्टेस को धर्म और जाति से न जोड़े। तो फिर आप ने इतने दिनों से कथित अंहिसा की पैरवी करने वाला पोस्ट क्यों नहीं डाला था??? बकरीद से पहले आपको क्यों याद आया???
छठा आप मत सिखाइए कि इस्लाम का क्या उद्देश्य है और इब्राहीम अलाइस्सलाम को किस चीज़ की कुर्बानी देनी थी और आज मुसलमान किस चीज़ की कुर्बानी दे रहे हैं। बेहतर होगा कि आप अपने वेद, मनु स्मर्ती, पुराण, महाभारत, गीता, रामायण आादि ग्रंथ पढ़े और इन ग्रंथों में लिखे रास्तों को अपने जीवन में ढाले... फिर हो सकता है कि आप इस तरह के पोस्ट न डालें।
Nihal Singh Arya
October 21 at 7:44pm
·
Like
Nouman Ahmed
जिस मांसाहार की आप बात कर रहे हैं। उसी मांस के प्रथम दस बड़े व्यपारियों की सूची आप निकाल कर देख लें आपको खुद बा खुद मालूम पड़ जाएगा कि कौन कितना बड़ा शाकाहारी है और कौन कितना बड़ा मांसाहारी
Nihal Singh Arya
October 21 at 7:47pm
·
Like
Nouman Ahmed
अंत में मुझे समझ नहीं आता है कि सरकार ने असम प्रकरण से सबक क्यों नहीं सीखा???? पता नहीं क्यों हमारी सरकार आप जैसे लोगों को देश में दंगे कराने की खुली छूट कैसे दे देती है??? क्यों ऐसे पोस्ट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है
October 21 at 7:47pm
·
Like
Nihal Singh Arya
Nouman Ahmed
स्वागत... पहली बात आपकी संकीण मानसिकता और कमजोरी यह बता रही है कि आपने इसे असम प्रकरण और न जाने किस किस से जोड़ दिया. मुद्दे से भटाकाने की आपकी एक और कोशिश नाकामयाब रही...पहली बात मैने आपसे पूछा था कि हमें माशाहार क्यो अपनाना चाहिए आपने मेरे प्रश्न का उत्तर नही दिया... मैने कहा जो भी इसे करता है चाहे हिन्दू हो या मुसलमान किसी को बेजुबान जानवरों की हत्या का अधिकार किसने दे दिया...
October 21 at 8:16pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
Nouman Ahmed
अगर मै गलत हू और आपकी नजर मैं आराजकता फैला रहा हू तो आपका कर्तव्य है कि इसकी शिकायत आप प्रशासन से करें... क्योंकि गलत को सुनना और देखना को उसमें भागीदार माना जाता है.. और मै आपको खुली छूट देता हू कि इसकी शिकायत आप प्रशासन से करें....जय़ मां भारती
October 21 at 8:21pm
·
Like
·
1
Nihal Singh Arya
Nouman Ahmed
अब कुर्बानी (ईद)के अवसर पर ही विरोध क्यों, तो जनाब यह व्यवारिक है कि जब आग लगती है तभी बुझाने के प्रयत्न किए जाते है। उसी तरह जब किसी कर्मकाण्ड में विशेष हिंसा होती है उसका विरोध भी तभी किया जाना चाहिए, अन्यथा बेमौसम की बरसात समान पानी निरर्थक ही बह जाएगा।
विदित हो कि भारत के अनेक देवी मन्दिरों में बलिप्रथा को जन-जागृति से बन्द कराया गया है। इसलिये जब हिंसा कोई धर्म ही नहीं है तो हिंसा-विरोध को किसी धर्म से जोड़ने की बात कहना आधारहीन है।
October 21 at 8:46pm
·
Edited
·
Like
·
1
Avenesh Singh
Nouman Ahmed जी यह सरकार तो बांग्लादेशी देशद्रोहियों को भी भारत में रहने की खुली छूट दे रखी है। जो खुलेआम देश की छाती पर मूंग दल रहे हैं। सरकार तो यहां तक कहती है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है। सरकार तो हज यात्रा पर भी सब्सीडी दे रही है। धर्म के नाम पर आरक्षण की तैयारी भी लगभग पूरी हो चुकी है। सांप्रदायिक एवं लाक्षित हिंस बिल भी कुछ लोगों की कृपा रही तो जल्द ही आ जायेगा। रोते रहिए जिंदगी भर...सरकार तो धर्मनिरपेक्षता माफ करिएगा शर्म निरपेक्षता पर उतारु है ही।
October 22 at 1:27am
·
Unlike
·
1
Nouman Ahmed
निहाल जी... आपके सवाल के क्राॅस में मैंने सवाल पूछा था कि मनुष्य को मांसाहार क्यों नहीं होना चाहिए??? तो आपने जवाब दिया था कि शाकाहारी कोमल होते हैं और मंासाहारी अहिंसक। इस पर मैंने कहा था कि यह ज़रूरी नहीं है कि जो शाकाहारी हो वो कोमल ही होगा। देश में बहुत से लोग हैं जो शुद्ध शाकाहारी हैं और कितने कोमल स्वभाव के हैं यह दुनिया जानती है।आप चाहें तो अपने ही कमेंट को पढ़ सकते हैं। इससे भी आपके प्रश्न का उत्तर आप मानने को तैयार नहीं हैं। तो मैं क्या कर सकता हूं। दूसरे आपने कहा कि मैं आपके पोस्ट को धर्म से जोड़ रहा हूं.. तो अपना पोस्ट खुद ध्यान से पढ़े और उसके हर शब्द पर गौर दें तो आपको मालूम पढ़ जाएगा कि इससे धर्म से कौन जोड़ रहा है। मैं या आप....
तीसरे आपने कहा कि इन दिनों ही कुर्बानी का विरोध इसलिए किया जा रहा है कि यह मौसम है विरोध करने का। खैर आप विरोध करिए.. आपको विरोध करने के लिए कोई मना नहीं करा रहा है।मगर एक बात कहूंगा कि हिन्दू ग्रंथों को नहीं पढ़ा है। अगर पढ़ा होता तो आप जानते कि वे ग्रंथ क्या कहते हैं। तो पहले आप उन गं्रथों को पढ़िए। फिर इस बाबत बात कीजिए।
एक बात और। आप बार बार कह रहे हैं कि सबको जीने का अधिकार है। तो क्या पेड़ पौधों को जीने का अधिकार नहीं है? आप तो अपने हिसाब से जीने के अधिकार को परिभाषित कर रहे हैं।
Nihal Singh Arya
October 22 at 4:54pm
·
Like
Nouman Ahmed
अविशेन जी.... शायद आपको मालूम नहीं है कि इस देश में कितने अन्य देश विद्रोही रह रहे हैं.... और कितना इस देश की छाती पर मूंग डाल रहे हैं। पता करलिजीए। जनाब सरकार के कहने से क्या होता है कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार किस का है। कुछ वर्ष पहले एक आयोग की रिपोर्ट आयी थी। उस रिपोर्ट ने बता दिया कि देश के संसाधनों पर किस का अधिकार है।तीसरे शायद आपको मालूम नहीं है कि देश में धर्म आधारित आरक्षण बहुत पहले से दिया जा रहा है।चैथे सरकार हज पर कोई सब्सिडी नहीं देती है। वो इस सिर्फ भ्रमित करने का एक तरीका है।पांचवे जिस कानून की बात कर रहे हो वो कानून को आप समझ नहीं रहे हो। उसके प्रावधानों को विस्तार से पढ़ें तो समझेंगे कि प्रस्तावित कानून क्या कहता है।Avenesh
Singh
October 22 at 5:19pm
·
Like
Avenesh Singh
भाई जी आपकी जानकारी के लिए आपके पहले सवाल का जबाब इसे गंभीरता से पढ़िएगा..और सत्यापन के लिए लिंक पर ध्यान देना..फिर अगली लाइन की ब्याख्या करता हुं. .झारखण्ड में एक स्कूल शिक्षक (बब्लू शेख) के यहाँ से पुलिस ने 9600 रुपये के नकली नोट बरामद किये। यह शिक्षक देवतल्ला का रहने वाला है, लेकिन पुलिस जाँच में पता चला है कि यह बांग्लादेश का निवासी है और झारखण्ड में संविदा शिक्षक बनकर काम करता था, फ़िलहाल बबलू शेख फ़रार है।
http://www.indianexpress.com/news/Rs-9-600-in-fake-notes-seized-from-J-khand-teacher-s-house/897515/
Jan 7th 2012
NIA की जाँच शाखा ने 7 जनवरी 2012 को एक गैंग का पर्दाफ़ाश करके 11 लोगों को गिरफ़्तार किया। इसके सरगना मोरगन हुसैन (पश्चिम बंगाल “मालदा” का निवासी) से 27,000 रुपये के नकली नोट बरामद हुए। पुलिस “धुलाई” में हुसैन ने स्वीकार किया कि उसे यह नोट बांग्लादेश की सीमा से मिलते थे जिन्हें वह पश्चिम बंग के सीमावर्ती गाँवों में खपा देता था।
http://www.hindustantimes.com/India-news/Hyderabad/NIA-busts-major-counterfeit-currency-racket-with-Pak-links/Article1-792860.aspx
Jan 2 2012
गुजरात के पंचमहाल जिले में पुलिस के SOG विशेष बल ने, एक शख्स मोहम्मद रफ़ीकुल इस्लाम को गिरफ़्तार करके उससे डेढ़ लाख रुपये की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की। ये भी पश्चिम बंग के मालदा का ही रहने वाला है, एवं इसे गोधरा के एक शख्स से ये नोट मिलते थे, जो कि अभी फ़रार है।
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-01-02/vadodara/30581292_1_currency-notes-fake-currency-state-anti-terrorist-squad
Dec 29 2011
सीमा सुरक्षा बल ने शिलांग (मेघालय) में भारत-बांग्लादेश सीमा स्थित पुरखासिया गाँव से मोहम्मद शमीम अहमद को भारतीय नकली नोटों की एक बड़ी खेप के साथ पकड़ा है, शमीम, बांग्लादेश के शेरपुर का निवासी है।
http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-12-29/guwahati/30569256_1_fake-indian-currency-currency-notes-bsf-troops
Rs 9,600 in fake notes seized from Jkhand teachers house - Indian Express
www.indianexpress.com
Rs 9,600 in fake notes seized from Jkhand teachers house - A joint team of the
...
See More
October 22 at 6:18pm
·
Edited
·
Like
·
Remove Preview
Avenesh Singh
इतना अध्ययन कर लेना फिर आपको देश के संसाधनों पर अल्पसंख्यकों के अधिकार की भी जानकारी देते हैं..
October 22 at 6:20pm
·
Like
Nouman Ahmed
janab apki jankari adhuri hai... nakali notes nepal k raste b kam nhi aate hain.... or nakali notes india me supply krne k tar nepal k purv rajkumar se b judate hain.... or mujhe aap ko ye batane ki zarurat nhi h ki nepal duniya ka kon sa ek matr desh h.... or me bangladesh ki koi side nhi le raha hun.. mene kaha h ki is desh me bht se desh k desh drohi niwas krte hain..... aap to mujhe ek ki hi detail dene lage hain.. koi nhi dusre ki mene de di....
Avenesh Singh
October 22 at 6:26pm
·
Edited
·
Like
Nouman Ahmed
or sansadhano pr b jankari dena zarur.... pir me uska counter b dunga
October 22 at 6:26pm
·
Like
Avenesh Singh
शायद आपने सभी लिंक्स को कायदे से नहीं पढ़ा। साथ ही भारत में बाग्लादेशी मुसलमानों से भारत को कितना खतरा है इसके बारे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी आगाह किया है। लेकिन अफसोस कि आप लोगो को शरीयत के अलावां किसी अन्य संस्था पर विस्वाश बने तब न समझेंगे।
October 22 at 6:33pm
·
Like
Nouman Ahmed
lagta h shayad aapne meri cmnt ko dhiyan se nhi pada h... islye aap mujh pr bebuniyad aarop laga rahe hain... mene apni cmnt pr kahin pr b aisa nhi likha h jisse suprme court ka contempt hota ho or bangaladesh ka favor hota ho... mene bs ek spl. comunity ki dukhti rag pr halka sa hath rakh diya hai......
October 22 at 6:38pm
·
Edited
·
Like
Avenesh Singh
मैने कौन सा आपके उपर हथौड़ा मार दिया।
October 22 at 6:46pm
·
Like
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)
देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2026
दीपावली से दिवाली का दौर
दीपावली से दिवाली का दौर दीपावली का अर्थ सामान्यत दीपो को जलाकर खुशिया मानाने वाला त्यौहार माना जाता आ रहा है । क्योंकि भारतीय ग्रंथो ...
एलुमनी में पुरुस्कार पाते हुए...,
(no title)
आते आते पत्रकार सबी लोगो की तरह मैंने भी २००९ में १२ साल स्कूल जाकर आखिर बारहवी पास कर ही ली जब पड़ना था तो हम मस्ती करा करते थे स्कूल में ड...