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Tuesday, May 18, 2021

मन्नतों के धागे

तुझे पाने के लिए बांधे हैं मैंने मन्नतों के धागे
तू पास है तो खुदा से अब क्या ही मांगे

तेरे साथ बैठू तो दिल राजधानी सा धड़कता जावे
हैं वो मंजिल मेरी तू जिसके लिए हमने रब्बा से खैर मनावे

तो क्या आज बोल दू वो दिल की बात
जिन ख्याबों को देखने के लिए जागे है पूरी रात

आज थाम लेना मेरा हाथ,  वादा है फिर खुदा भी न ये छुड़ा पावे

रहूंगा तेरा उम्रभर सात फेरे में जो गांठे हैं बांधी
आए तुझ पर मुसीबत तो उम्र मेरी हो जाए आधी

मेरे ख्वाब हैं जन्नतों से आगे
हो हमारा घर वहां जिसे किसी की नजर न लागे

तेरे आने से खुशियां भी निहाल 
तुझे बता दिया दिल का हाल

तुझे पाने के लिए बांधे हैं मैंने मन्नतों के धागे
तू पास है तो खुदा से अब क्या ही मांगे