Sunday, April 22, 2018

पृथ्वी दिवस पर यमुना में किया जल अर्पण

- सोनिया विहार में यमुुुुना किनारे किया गया आयोजन 

पृथ्वी दिवस के मौके पर इकोस्फेयर ने अपने अथाह प्रवाह अभियान के तहत सोनिया विहार में यमुना नदी के किनारे जल अर्पण का कार्यक्रम किया। रविवार सुबह आयोजित कार्यक्रम में मां यमुना की आरती और नदियों के घटते प्रवाह पर जन संवाद भी हुआ। लोगों ने नदी से जुडी अपनी यादें साझा की। और प्रवाह को बरकरार रखने के लिए संकल्प लिया।
इकोस्फेयर के महासचिव प्रशांत गुंजन ने अभियान का मकसद बताते हुए कहा कि आज भागमभाग दुनिया में सभी ने अपनी जरूरतें बढ़ा ली हैं। लेकिन जलस्रोतों की परवाह करना छोड़ दिया है। इसका प्रमुख कारण लोगों का जलस्रोतों से कटाव है। अथाह प्रवाह अभियान के तहत लोगों को जल स्रोत के नजदीक लाकर पानी की दुर्दशा के प्रति संवेदनशील बनाना है। साथ ही अपनी संस्कृति व परंपराओं में निहित जल संरक्षण के पूरे सिस्टम के सहारे पानी का प्रबंधन करना है। इसमें बात समाज व उपलब्ध जल के बीच के रिश्तों पर की गई।
केमिकल एवं फर्टीलाइजर मंत्रालय के औद्योगिक सलाहकार डॉक्टर रोहित मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकार इंसान आक्सीजन के लिए पाइप से जुड़ा रहता है, वैसे ही आज का समाज पानी के लिए पाइप से जुड़ा है। अत: जल स्रोतों की दशा सुधारने का प्रयास करना जरुरी है।हिंदी के कवि भुवनेश सिंघल ने कहा कि अभियान  आज जलसंकट के लिए बेहद उपयोगी है। जलस्रोतों की सुधि लेना और उनकी दशा व प्रवाह अथाह बनाए रखना आज की जरूरत है। 
महापंडित चंद्रमणि मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आज के समय प्यासा कुएं के पास जाने के बजाए पाइप से कुएं को अपने पास बुला रहा है। अपने इसी अभिमान में जल स्रोतों की भयंकर दुर्दशा कर दी है। अब वह समय आ गया है कि हमें जल की समस्या के प्रति सचेत हो जाना चाहिए। तभी अमूल्य जल का संरक्षण हो सकेगा। कार्यक्रम में श्री यमुना सेवा समिति के महासचिव व स्थानीय निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, पंडित अनिल गोस्वामी, चौधरी त्रिलोचन सिंह, विनोद शर्मा समेत दूसरे कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये।कार्यक्रम का समापन यमुना आरती व इस संकल्प के सहारे किया गया कि यमुना के जल को आचमन लायक बनाने के लिए व्यक्ति व समाज के स्तर पर पूरी संजीदगी से काम करेंगे।
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इकोस्फेयर के बारे में:
इकोस्फेयर की स्थापना 2011 में की गयी। इसका मुख्य उद्देश्य आज के समाज में सतत विकास, पर्यावरण, ऊर्जा एवं पुरातन तकनीकी ज्ञान व संस्कृति की विभिन्न अवधारणाओं को प्रसारित व उपयोग में लाना है। अथाह प्रवाह श्रृंखला इसी कड़ी में एक अनूठा प्रयास है, जिसमें संवाद की अपनी परंपरा को गहरा करने के लिए हर उस मुद्दे पर समाज के स्तर पर विमर्श किया जा रहा है, जिसमें प्रवाह वर्तमान है। 

Saturday, March 24, 2018

ब्लॉग :मोदी जी सुनिए... ऐसे तो बर्बाद हो जाएंगे परिवार

दिल्ली में 15 दिसंबर 2017 के बाद ऐसी बयार चली जिसमें बहुत से लोगों का जीवन खतरें में पढ़ गया। यह बयार कोई प्राकृतिक बयान नहीं थी बल्कि यह बयार सीलिंग की थी। छुट-पुट शुरू हुई इस सीलिंग से लोगों के घर बार उजड़ रहे हैैं, जो लोग किसी न किसी तरीके से अपना जीवन यापन कर रहे थे, आज उन परिवारों पर संकट के बादल छा रहे हैैं। लेकिन दिल्ली की राज्य सरकार और नगर निगम अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैैं। वहीं कथित व्यापारी नेताओं को भी अखबरों में नियमित छपने का अवसर मिल गया। यही वजह है कि अभी तक व्यापारी नेता राज्य सरकार और नगर निगम समेत केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय पर कोई नैतिक दवाब बनाने में भी नाकाम रहे हैैं। अगर व्यापारी नेता कामयाब रहे होते तो अब तक दिल्ली में सीलिंग से उजड़े परिवारों को दर्द अखबारों की फ्रंट पेज की हेडलाइन बनता। आज भी दिल्ली में सीलिंग की खबर चौथे या पांचवे पन्ने की खबर बन रही है। इसमें मीडिया
का दोष नहीं है, कि मीडिया चौथे और पांचवे पन्ने पर सीलिंग की खबरों को स्थान दे रहा है। बल्कि दोष इन व्यापारी नेताओं का है जो सीलिंग पर सरकार पर दवाब बनाने में विफल साबित हो रहे हैैं।

वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से लेकर मॉनिटरिंग कमेटी भी जनता को सही संदेश नहीं दे पा रही है। जनता ने अवैध निर्माण किया है उसकी सजा उसे सीलिंग के तौर पर मिल रही है। लेकिन अभी तक उन पुलिस वालों और निगम के अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई जिनकी मौजूदगी में यह अवैध निर्माण से लेकर अवैध कब्जे पनपे। क्या सुप्रीम कोर्ट और मॉनिटरिंग कमेटी इन अफसरों को बचा रही है। अभी तक की कार्रवाई से तो लोगों को यही लग रहा है। स्पष्ट कर दूं कि यह लेख कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ नहीं है, लेकिन एक पत्रकार होने के नाते जो ग्राउंड लेवल पर लोगों का दर्द यही है। क्योंकि जनता का कहना है कि संपत्ति सील कर दी थी... ठीक है... लेकिन उस निगम अफसर या पुलिस वाले पर कार्रवाई कब होगी जिसने इस अवैध निर्माण और कब्जे को पनपने दिया। क्या  उस समय एमसीडी के अफसर कुंभकरणी नींद सोये हुए थे। बिल्कुल नहीं। एमसीडी के अफसर और नेता पैसा बना रहे थे। लेकिन अभी तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं। वह अफसर रिटायर भी हो चुके हैैं।  और उस समय कमाया हुआ पैसा ठिकाने भी लगा चुके हैैं। लेकिन जनता का दोष इतना है कि उसने जीवन भर की कमाई को एक प्लाट या दुकान खरीदने में लगा दिया। अब उसकी कमाई तो डूबी ही उसका जीवन भी डूबने की कगार पर है। लेकिन नेता और अफसर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैैं। इस तरह हजारों परिवार उजड़ जाएंगे। और दिल्ली में सात सांसदों वाली भाजपा और दिल्ली के 66 विधायकों वाली आम आदमी पार्टी का कोई नाम लेवा नहीं रहेगा। भले ही अपनी-अपनी राजनीति चमकाकर कोई सीटें बचा ले लेकिन जनता देख रही है कि उनकी इस दुख की घड़ी में राजनीतिक पार्टियां साथ नहीं है। बस ड्रामे बाजी पर उतारू है।
एक दुकान होने से एक व्यक्ति नहीं कम से कम 50 व्यक्ति का रोजगार छिनता है। इसलिए क्यो  न उस सरकारी एजैैंसियों पर भी कार्रवाई की जाए जिन्होंने इस अवैध निर्माण को पनपे दिया और लोगों की जरूरत के मुताबिक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए।

अवैध कालोनियों में मजबूरी में रहे है लोग

अवैध कालोनियों दिल्ली की राजनीति की सबसे बड़ी दुकान बन चुकी है। सभी पाटियां चुनाव के समय इन्हें नियमित करने और इनमें सुविधाएं देने का लालच देकर वोट तो ले जाती है, और सरकार भी बना लेती है, लेकिन इन कालोनी वासियों को दिल्ली में सरकार बनने के बाद मिली है तो सिर्फ दुत्कार। अपनी-अपनी राजनीति का थीकरा निगम के लोग और राज्य सरकार के लोग करते हैैं। यह लोग एक साथ आकर इन कालोनियों को नियमित करने के लिए कदम क्यों नहीं उठाते समझ से परे है। शायद सबको अपनी राजनीति खत्म होने का ठर है। लेकिन लोगों का जीवन तो बर्बाद हो रहा है। यहां रहने वाले लोग शौक से अपना जीवन यापन नहीं कर रहे है। सभी लोगों को पार्किंग और पार्क की सुविधा चाहिए जिसे देने में निकाय और सरकार विफल साबित हुई है।

कांग्रेस का जिक्र इसलिए नहीं हैक्योंकि यह समस्या कांग्रेस की बनाई हुई है



Saturday, February 10, 2018

सीलिंगः ये पट्टी जख्म ठीक नहीं बल्कि जख्म बढ़ा रही है

- सीलिंग का आंखो देखा हाल

अक्सर जब भी चोट लगती है तो डॉक्टर चोट के हिस्से पर बहते हुए खून को रोकने के लिए डिटॉल लगाकर लगाकर खून को रोक देता है। और मरहम लगाकर पट्टी कर देता है। ताकि चोट जल्दी ठीक हो जाए। लेकिन दिल्ली में यह मरहम वाली पट्टी चोट को ठीक करने की बजाय घांव बढ़ा रही है।
यह घांव व्यापारियों के दुकानों की सीलिंग की वजह से बढ़ रहे हैं। जो वर्षो से अपनी दुकान चला रहे थे। व्यापारी सीलिंग के डर से पहले ही खौफ में थे, लेकिन अचानक सीलिंग का दस्ता आकर उनकी भी दुकानें सील कर रहा है। और दुकान के दरवाजे पर लगे ताले पर इस तरह से पट्टी कर रहा है जैसे डॉक्टर गंभीर जख्म के बाद जख्म को पट्टी पर लगे मरहम से ढकने की कोशिश करता है। चोट पर पट्टी इसलिए ज्यादा लगाई जाती है ताकि चोट जल्द ठीक हो सके। लेकिन निगम का सीलिंग दस्ता ताले पर पट्टी इसलिए ज्यादा लगा रहा है ताकि व्यापारी पर सीलिंग का जख्म ज्यादा दिन तक रहे। कई जगह इस पट्टी को लगाने के लिए कील भी ठोंकी जा रही है तकि उस रस्सी बांध कर इसे लगाया जा सके। क्योंकि दशक भी बीत जाए तो पट्टी न गले भले ही दरवाजा गल जाए। निगम द्वारा पट्टीलगाने के बाद लाल रंग की प्लास्टिक को मोमबत्ती से लौ (आग) से पिघलाकर उसे पीतल की बनी निगम की मोहर से ऐसे चिपकाया जाता है । यह उसी तरह होता है जैसे कोई गहरे जख्म में गर्म सुंआ छुआ (टच) कर रहा हो।
इस दुकान से मालिक पने परिवार के साथ अपने उस छोटू या मोटू का भी परिवार चला रहे थे जो उनके यहां पहले कभी साफ सफाई के लिए आता था। अब छोटू और मोटू बढ़े हो गए हैैं तो वह सफाई के साथ ग्राहकों को पानी भी पिला देते हैैं और मालिक के लिए दिन में खाना का भी इंतजाम कर देते हैैं। लेकिन दुकान सील होने से मालिक सड़क पर आ गए हैैं तो अब छोटू और मोटू को कौन पूछेगा ! छोटू और मोटू के परिवार वाले भी पूछ रहे है कि बिटवा दुकान पर काहे नहीं जा रहा हैं। बिटवा क्या करें और क्या कहे बस यही कह सकता है कि निगम वालों ने उसके मालिक की दुकान सील कर दी है। उसे नहीं पता की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। उसके मन में यही सवाल है कि जब मालिक गलत दुकान चला रहा था तो उसी समय क्यों नहीं दुकान बंद करवाई गई। अब जब दुकान से कई परिवार चल रहे हैैं तो इस मौके पर आकर दुकान क्यों बंद कर दी। जब तो निगम वाले भी दुकान पर आकर  चाय भी पीकर जाते थे और पुलिस वाला भी अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों को अपने नाम का हवाला देकर शॉपिंग करने की हिदायत देता था और मालिक को फोन करके सस्ते दाम पर वस्तुएं देने का आदेश देता था। पर अब वहीं पुलिस वाला निगम वालों को खड़े होकर बता रहा है कि यह दुकान भी नियमों के खिलाफ बनी है। पुलिस वाला अब मालिक से तो आंखे मिलाना छोडिए वह उस छोटू और मोटू की तरफ से भी शर्म से नहीं देख पा रहा है जो उसे पानी और चाय लाकर देते थे और फिर से झूटे बर्तन उठाकर ले जाते थे।

Friday, September 29, 2017

उस रावण को नहीं कलयुग के इस रावण को जलाने की जरूरत है









हम हर साल दशहरा का त्योहार मनाते हैं। विजयदशमी वाले दिन अपने बच्चों के साथ बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रावण को जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं। लेकिन कभी सोचा है कि हम रावण को क्यों जलाते है? उसका कसूर क्या था? यही कि उसने भगवान श्रीराम की अर्द्धांगिनी मां सीता का पंचवटी से अपहरण किया था।  
वह भी किसलिए अपनी बहन की कटी नाक का बदला लेने के लिए, जिसे हम सिर्फ कहानियों में सुना करते हैं। लेकिन इस कलयुग के रावण का क्या जो एक अपराधी, भ्रष्टाचारी और बलत्कारी के रूप में हमारे अंदर है। आज देश की जनता अपराध, भ्रष्टाचार और बलात्कारी रूपी रावण से त्रस्त है। जिसको नष्ट करना हम सब की जिम्मेदारी बनती है। 
हम उस रावण को सदियों से जलाते हुए आ रहे है जिसने मां सीता को छूने का दुस्साहस किया था। लंकापति रावण पापी था, अधर्मी, दुराचारी था, लेकिन बलत्कारी नहीं था। रावण का एक रूप और था। वह भगवान शंकर का पुजारी होने के साथ-साथ महाज्ञानी पंडित था। इन्हीं सब कारणों से माता सीता का अपहरण करके दो वर्ष तक अपनी कैद में रखने के पश्चात भी रावण ने माता सीता को छुआ तक नहीं था। रावण चाहता तो मां सीता के साथ जोर-जबरदस्ती कर सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। आज हमें उस रावण को नहीं, बल्कि कल्युग की इस रावण को मारने की जरूरत है जो इंसान के अंदर एक अपराधी, भ्रष्टाचारी और बलत्कारी के रूप में छिपा बैठा है। 
प्रमोद गोस्वामी,लेखक
समाज में आजकल ऐसे कितने ऐसे दुराचारी हैं बच्चों, लड़कियों और औरतों के साथ दुराचार कर रहे हैं। रामरहीम जैसे पवित्र नाम का चोला पहने श्बाबाश् रूपी रावण ने न जाने कितने सीता का चीरहरण किया है। देश में कई ऐसे रावण है जिससे रोज एक सीता को अग्निपरिक्षा से गुजरना पड़ता है। जरूरत है ऐसे रावण को जलाना, जो ‘बाबा’ की आड़ में मासूम बहू-बेटियों को अपना शिकार बना रहा है, जो देश की तरक्की और देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहा है। देश में भ्रष्टाचारी और बलत्कार रूपी रावण को मिटाने के लिए हमें आगे आना होगा। एक बार फिर भगवान राम की तरह अपना सब कुछ त्याग करने की आवश्यकता है। आइए हम सभी देशवासी विजयदशमी के दिन इसका संकल्प ले।

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Sunday, July 2, 2017

शौक भारत को देखने और दिखाने का


 फेसबुक के जरिए युवाओं को बाइक देश की शेर करा रहे युवा
-    बाइक से देश घूमने की चाह
घूमने का शौक किसे नहीं होता, लेकिन सब विदेश घूमने जाना चाहते हैं। लेकिन दिल्ली के कुछ युवा ऐसे हैं जिन्हें दूसरे युवाओं को भारत घुमाने का शौक सिर चढ़ गया है। देश की बेहतरीन और चर्चित जगहों पर बाइक से घुमाने का शौक है। यही नहीं जिन्हें साथ ले जा रहे उन्हें कोई दिक्कत न और घूमने की यादगार अनुभव रहे ऐसे व्यवस्था यह ग्रुप करते हैं। तीन दोस्तों से शुरू यह समूह अभी तक तीन सौ से ज्यादा युवाओं को देश के कोने-कोने की सैर करा चुका है।
समूह से जुड़े प्रजन्य मेहता बताते हैं कि जब वह पढ़ाई कर रहे थे तो उन्हें उस दौरान देश को घूमने का आइडिया दिमाग में आया। इसकी चर्चा उन्होंने अपने दोस्तों से की तो दोस्त पहले एक दो घूमकर आए हुए थे। वह भी उनके साथ घूमने चले गए। फिर जब ऐसी फोटो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की तो और लोगों ने भी इसकी जानकारी ली। फिर इससे एक के बाद एक लोग जुड़ते गए। गए दो-तीन साल मे शुरू हुआ यह सफर अब तीन सौ से ज्यादा बाइक राइडर्स तक पहुंच गया है।

बाइक से कोई फर्क नहीं पढ़ता, जज्बा आपके अंदर हो
बाइक राइडिंग ग्रुप से जुड़े तनुज चुघ बताते हैं कि जिन युवाओं को बाइक राइडिंग हमारे साथ करनी हैं वह अपने जज्बे के साथ सोशल मीडिया पर हमसे संपर्क कर सकते हैं।  इसमें बस राइडिंग करने वाले के पास बाइक होनी जरुरी होती हैं। चाहे वह कोई सी भी बाइक हो। इससे कोई फर्क नहीं पढ़ता। बस आपके अंदर बाइक को लॉग टूर पर चलाने का जज्बा होना चाहिए। अगर बाइक नहीं हैं तो वह उपलब्ध करा देते हैं, लेकिन उसके लिए उनसे कुछ राशि ली जाती है। इसके बाद वह जा सकते हैं। तनुज के अनुसार उन्हें घूमने के अऩुभव से यह पता चल गया है कि अगर लद्दाख जा रहे हैं तो वहां पर पैट्रोल पंप कहा कहा है। रहने की व्यवस्था कैसे होगी। और तो अगर बाइक में कुछ प्राब्लम हो गई तो उसे रिपेयर कैसे और कहा कराया जा सकता है इसकी जानकारी है। तो इसलिए उनके साथ जाने वाले को कोई प्रॉब्लम नहीं होती।
लड़किया भी जाती है सैर पर

 बाइक राइडिंग ग्रुप में केवल लड़के ही नहीं लड़किया भी जाती है। कई बार ऐसा हुआ है कि उनके साथ बाइक लेकर लड़किया भी गई है। कुशल का कहना है कि उनके साथ कोई भी जा सकता है। बस शर्ते वह अपनी मर्जी से जा रहा हो। हमारे ग्रुप में सबका स्वागत है। सुशील कुशल के अनुसार जब भी वह घूमने जाते हैं तो ज्यादातर साथ जाने वाले लोग नए होते हैं। और इससे एक दूसरे को भारत घुमाने की चैन बढ़ती जा रही है। प्रजन्य का कहना है कि भारत जैसे पर्यटन स्थल साथ ही किसी और अन्य देश में मिलते हो। इसलिए हमने तय किया है कि भारत के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों का बाइक से घूमने का लक्ष्य पूरा करना है। और लोगों को भी भारत के पर्यटन के बारे में बताना है। 
साभार : पंजाब केसरी









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