Wednesday, May 5, 2021

ये लालफीता शाही

जो मानवता को बचाने के काम न आई
नहीं चाहिए हमें ऐसी लाल फीताशाही

तुम तो यूपीएससी पास करके आते हो
सुना है हर खतरें और भविष्य को पहले ही भाप जाते हो

फिर कैसे लोगों के सामने ये लाचारी आई
इलाज न मिल पाने की वजह लाखों ने जान गंवाई?

तुम तो बाबू हो, सरकारी घर भी मिला है 
मेरे टैक्स से तुम्हे वेतन और तुम्हारा परिवार चला है

जिसने तुम्हे टैक्स दिया उसके घर पर ये विपत्ति कैसे आई
नहीं चाहिए हमें ऐसी लालफीताशाही

एसी कमरों और आलीशान दफ्तर से बाहर तुम निकले होते 
तो ऐसे दिन हम न देख रहे होते

तुम्हे क्या पता घर से अर्थी जाने के बाद कैसी होती है तन्हाई
नहीं चाहिए हमें ऐसी लालफीताशाही

जी हूजूरी से आगे भी तुमने सोचा होता
सच्चाई को खादी के सामने तुमने बोला होता

मैं नहीं कहता कि तुम ही जिम्मेदार हो
लेकिन हर मौत के पीछे तुम ही किरदार हो

देखों भारत की कैसी हो रही जग हसाई
नहीं चाहिए हमें ऐसी लाल फीताशाही


मेरे शब्दों का ये हाल हुआ है
आज तो निहाल भी मौत का मंजर देख बेहाल  हुआ है।

सिस्टम हैं या लाश हैं...

मुझे तलाश है सिस्टम की 
तुम तो लाश हो गये क्योंकि आक्सीजन कम थी

तड़प रहा हूं तेरे दर पर आकर
कोई तो सांस ही दे दें मेरे घर पर आकर

होटलनुमा जो तुमने अस्पताल बनाए हैं
किसी काम के नहीं जब दरवाजे पर चीखें और श्मशान में चिताएं हैं

किसी की मां को चाहिए, किसी के बाप को चाहिए, किसी के दादा को चाहिए किसी की दादी को चाहिए 
एक बेड दिलाने के लिए ऊपर तक पहचान चाहिए

तुम तो कहते तो तुम रखवाले हो
पर सांस ही न दे पाएं तो किस बात का अंहकार पाले हो

तुम दावें बड़े-बड़े करते हो
जब खुद बीमार हो प्राइवेट अस्पताल में बेड ढूंढते हो

मुझे तो एक बेड दिलाने में कई रातें लग गई
पर तुम्हारें छींक आने पर ही कैसे आक्सीजन लग गई

मुझे तलाश है सिस्टम की 
तुम तो लाश हो गये क्योंकि आक्सीजन कम थी

आक्सीजन की कमी से केवल इंसान नहीं मरा है
मरा तो सिस्टम भी है जिसके लिए निहाल कफन ढूंढ रहा है

Thursday, March 4, 2021

अच्छा लगता है

सड़कों पर यह जाम अच्छा लगता है 
पटरी पर लौट रहा है काम अच्छा लगता है

सीएनजी के लिए पंप पर लगी वाहनों की कतार में इंतजार अच्छा लगता है।
बाजारों में मईया कर रही मोल भाव अच्छा लगता है

देश में कोरोना को हो रहा काम तमाम अच्छा लगता है।
टीका बनाकर भारत ने विश्व में कमा लिया नाम अच्छा लगता है। 

स्कूलों में कोरोना से बचने का है इंतजाम
बालकों की चहचहाहट से मैदान बना गुलफाम अच्छा लगता है। 

दिल झूमे फिर आई हैं मस्ती भरी शाम
डिस्कों में टकरा रहे हैं कांच भरे जाम अच्छा लगता है

चौक चौराहों पर हैं चर्चाएं हैं आम 
कोरोना के बाद निहाल ने कविता लिखकर कमाया नाम अच्छा लगता है। 




Friday, January 29, 2021

सिंगल कॉलम खबर मत बनना

मेरी मौत तुम सिंगल कॉलम खबर मत बनना
बनों तो पहले पन्ने की लीड बनना
हो कोई तुमसे बड़ी खबर
तो तुम कम से कम एंकर बनना
एक नजर में सिमटी तो
जान न पाएगा कोई मुझे
खबर पढ़कर अगली खबर पर चला जाएगा
रिपोर्टर हूं कम से कम किसी की बायलाइन बनना
मेरी मौत तुम सिंगल कॉलम खबर मत बनना
तेरा शीर्षक हो ऐसा,  जो कभी पहले न लिखा हो वैसा
पहले पन्ने की लीड बनो तो फीचर पन्ने स्पेशल पेज बनना
मेरी मौत तुम सिंगल कॉलम खबर मत बनना
वास्ता हैं तुम्हें उस काली स्याही का
तुम बनाना हेडलाइन मेरी विदाई का 
मेरी मौत से दिल सबका बेहाल हुआ है
काम करा है ऐसा कि जमाना निहाल हुआ है। 
-निहाल सिंह