Monday, February 16, 2015
Tuesday, February 3, 2015
Thursday, January 29, 2015
Wednesday, December 31, 2014
भाई कोई मरे तो मुझे जरुर बताना
- चुनावी तिकड़म के चलते शमशान घाटों और जागरणों में हाजिरी लगा रहे हैं नेताजी
- रोजाना 4-5 क्रियाओं में शामिल होने लगे नेताजी
- विधानसभा लडऩे के लिए स्थानीय लोगों को जोडऩे की नई तिकड़म अपना रहे हैं दिल्ली के नेता
नई दिल्ली, (निहाल सिंह): दिल्ली में चुनावों की आहट के साथ ही, नेताजी इलाके में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं, हालात यह हैं कि नेताजी ने अपने चंपूओं को आदेश दिया है कि इलाके में किसी की भी मृत्यु होने पर उन्हें तुरन्त बताया जाए। नेताजी किसी की मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरन्त शोक स्थल पर जा बैठते हैं।
सूत्रों की मानें तो इसके लिए नेताजी बकायदा अपना भेष भी कुछ ऐसा बनाते हैं, कि शोकाकुल परिवार को लगे की जैसे नेताजी खबर मिलते ही सबसे पहले उनके ही घर आ गए हैं।
चुनाव से पहले अपने आकाओं के सामने हाजिरी लगाने वाले नेता अचानक से अर्थियों के सामने हाजिरी लगा रहे हैं। आलम यह है कि नेताजी सुबह शाम शमशान घाटों, कब्रिस्तानों में नजर आने लगेे हैं।
भाजपा, कांग्रेस सहित आम आदमी पार्टी के नेता भी इस चुनावी तिकड़म को भिड़ा रहे हैं। कहीं-कहीं तो चौंकाने वाली स्थिति नजर जाती है। आमतौर पर कई चक्कर लगाने के बाद भी न उपलब्ध हो पाने वाले नेताजी अपने प्रतिद्वंदियों के साथ शमशान घाट में नजर आते हैं।
नेताजी की संवेदनशीलता का आलम यह है कि अपनी-अपनी विधानसभा में नेताजी ने अपने कुछ चंपूओं को मौत, क्रिया, जागरण, भजन संध्या पर खास नजर रखने के निर्देश दिए हंै। वहीं कुछ नेताओं का हाल तो यह है कि पार्टी दफ्तर पहुंचने से पहले भी अगर कोई मौत की खबर आ जाती है तो नेताजी वहीं से अपनी गाड़ी मुड़वा लेते हैं। और अपने चंपूओं से बस शमशान घाट का नाम पूछते हैं। खास बात यह है कि नेताजी की कार में शोक सभा में जाने का भी पूरा इंतजाम रहता है। जैसे ही नेताजी को मौत की खबर मिलती है नेताजी गाड़ी में ही सूट-वूट उतारकर अपने पुराने कुचड़े-मूचड़े कपड़ों को पहन लेते हैं। अगर नेताजी को पता चलता है कि शोकाकुल परिवार का इलाके में काफी प्रभाव है तो नेताजी घडिय़ाली आंसू भी बहाने में पीछे नहीं रहते।
वहीं कुछ नेताओं ने अपने चंपूओं को उनके ऑफिस में जागरण और शोक सभाओं के कार्ड देने आने वालों को खास तरह का ट्रीटमैंट देन का निर्देश भी दे रखा है। नाम न छापने की शर्त पर एक नेताजी का कहना है किसी के सुख दुख में शामिल होने से परिवार को दुख सहने की शक्ति मिलती है। लेकिन जानकार बताते हैं कि किसी शोक सभा, क्रिया, जागरण में जाने से स्थानीय लोग नेताजी से आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं, जिसका फायदा नेताजी को चुनाव में मिलता है।
- रोजाना 4-5 क्रियाओं में शामिल होने लगे नेताजी
- विधानसभा लडऩे के लिए स्थानीय लोगों को जोडऩे की नई तिकड़म अपना रहे हैं दिल्ली के नेता
नई दिल्ली, (निहाल सिंह): दिल्ली में चुनावों की आहट के साथ ही, नेताजी इलाके में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं, हालात यह हैं कि नेताजी ने अपने चंपूओं को आदेश दिया है कि इलाके में किसी की भी मृत्यु होने पर उन्हें तुरन्त बताया जाए। नेताजी किसी की मृत्यु की सूचना मिलते ही तुरन्त शोक स्थल पर जा बैठते हैं।
सूत्रों की मानें तो इसके लिए नेताजी बकायदा अपना भेष भी कुछ ऐसा बनाते हैं, कि शोकाकुल परिवार को लगे की जैसे नेताजी खबर मिलते ही सबसे पहले उनके ही घर आ गए हैं।
चुनाव से पहले अपने आकाओं के सामने हाजिरी लगाने वाले नेता अचानक से अर्थियों के सामने हाजिरी लगा रहे हैं। आलम यह है कि नेताजी सुबह शाम शमशान घाटों, कब्रिस्तानों में नजर आने लगेे हैं।
भाजपा, कांग्रेस सहित आम आदमी पार्टी के नेता भी इस चुनावी तिकड़म को भिड़ा रहे हैं। कहीं-कहीं तो चौंकाने वाली स्थिति नजर जाती है। आमतौर पर कई चक्कर लगाने के बाद भी न उपलब्ध हो पाने वाले नेताजी अपने प्रतिद्वंदियों के साथ शमशान घाट में नजर आते हैं।
नेताजी की संवेदनशीलता का आलम यह है कि अपनी-अपनी विधानसभा में नेताजी ने अपने कुछ चंपूओं को मौत, क्रिया, जागरण, भजन संध्या पर खास नजर रखने के निर्देश दिए हंै। वहीं कुछ नेताओं का हाल तो यह है कि पार्टी दफ्तर पहुंचने से पहले भी अगर कोई मौत की खबर आ जाती है तो नेताजी वहीं से अपनी गाड़ी मुड़वा लेते हैं। और अपने चंपूओं से बस शमशान घाट का नाम पूछते हैं। खास बात यह है कि नेताजी की कार में शोक सभा में जाने का भी पूरा इंतजाम रहता है। जैसे ही नेताजी को मौत की खबर मिलती है नेताजी गाड़ी में ही सूट-वूट उतारकर अपने पुराने कुचड़े-मूचड़े कपड़ों को पहन लेते हैं। अगर नेताजी को पता चलता है कि शोकाकुल परिवार का इलाके में काफी प्रभाव है तो नेताजी घडिय़ाली आंसू भी बहाने में पीछे नहीं रहते।
वहीं कुछ नेताओं ने अपने चंपूओं को उनके ऑफिस में जागरण और शोक सभाओं के कार्ड देने आने वालों को खास तरह का ट्रीटमैंट देन का निर्देश भी दे रखा है। नाम न छापने की शर्त पर एक नेताजी का कहना है किसी के सुख दुख में शामिल होने से परिवार को दुख सहने की शक्ति मिलती है। लेकिन जानकार बताते हैं कि किसी शोक सभा, क्रिया, जागरण में जाने से स्थानीय लोग नेताजी से आसानी से कनेक्ट हो जाते हैं, जिसका फायदा नेताजी को चुनाव में मिलता है।
Sunday, December 28, 2014
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